कभी इस देश मे तो कभी उस देश मे, कभी इस शहर मे तो कभी उस शहर मे…एक धमाका और कई जाने तबाह हो जाती हैं..इस सत्ता ( या फिर अस्तित्व ??) की लडाई मे किसी की जीत नही होती लेकिन हर बार हारती सिर्फ मानवता है….पता नही किन परिस्थितियों की वजह से मानव इतना खूँखार और विद्रोही हो जाता है…
मुझे ये कहना है—ये झो भी हो रहा है ,,बहुत ग़लत हो रहा है .
चलो चलें नव युग की ओर !!
जहाँ हो शान्ति चारो ओर !!
Nov 29, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment